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Sharanagati

Collected words from talks of Swami Tirtha




(श्री भ.क.तीर्थ  महाराज, २००७ /०२ /२६  के व्याख्यान से उद्धृत , सोफिया)
आस्था हमारे अस्तित्व के   परम लक्ष्य को समझने की विधि है. विश्वास एक इंसानकी सबसे बड़ी शक्ति है. हम बार बार  कह  सकते हैं या हम वास्तव में, गहराई से महसूस कर सकते हैं कि “मैं भगवान का सेवक हूँ”. सतही पुनरावृत्ति  कुछ  नहीं है. सतही पुनरावृत्ति मदद नहीं करेगी . लेकिन अगर हम गहराई से खुद को समर्पित कर देते हैं , अगर हम वास्तव में ईश्वर पर निर्भर हैं ना कि अपनी  योजनाओं पर – तो यह काम करना शुरू कर देता  है.
कैसे यह विश्वास प्राप्त किया जाए : अगला सवाल यह होना  चाहिए? यदि विश्वास इतना मजबूत है और यह बहुत महत्वपूर्ण है कि यह कैसे प्राप्त हो , यह कैसे मिले ?
“भगवद गीता” में,  श्रीला  प्रभुपाद   का एक आशय यह  है कि आस्था  भक्तों के  सहयोग से आता है. तो हम विश्वास प्राप्त कर सकते हैं ,उनसे जिनके पास यह है, श्री गुरु के आशीर्वाद से और वे क्या सुझाव दे रहे हैं-उसके अभ्यास से  विश्वास प्राप्त कर सकते हैं. ये सभी बहुत महत्वपूर्ण तत्व हैं.क्योंकि अगर हम गहन  विश्वासी लोगों के साथ जुड़ते हैं तो हमें  भी गहन विश्वास  होगा.यदि आप ऐसे लोगों के साथ हैं , जो झिझक रहे हैं ,तो आप भी आप भी संकोच करेंगे. यदि आप शराबी के साथ हैं , आप एक शराबी होंगे , है ना? तो अपना सहयोगी चुनो. एक उच्च, आध्यात्मिक जुडाव को खोजने की कोशिश करें. यह हमारा  अतीत होना चाहिए, यह हमारा  वर्तमान हो  और यह हमारा  भविष्य होना चाहिए चाहिए- भक्तों के साथ संबद्ध.
एक बार जब श्रीला  भक्ति प्रोमोद  पुरी गोस्वामी महाराज से पूछा  गया – वे  एक सौ साल के पवित्र  संत थे : “महाराज, आप अस्सी साल से  भक्ति का अभ्यास कर रहे हैं, आप का  निष्कर्ष क्या है” उन्होंने एक क्षण के लिए सोचा  और कहा: “…भक्तों की संगत के बिना यह काम नहीं करता “यह उनका  निष्कर्ष था. कृपया, इस सलाह पर ध्यान देना. अच्छे , आध्यात्मिक, उच्च  संघ के बिना, यह बहुत, बहुत कठिन  है. इसलिए हमें  एक सकारात्मक वातावरण कि खोज करनी  चाहिए – एक ऐसी संगत  हमारे विकास में मदद करती  है .-रक्षा करती है ,मदद करती है ,उसे बढाती है …….पोषक संगत . क्यों?क्योंकि अगर तुम एक विरोधी वातावरण में बढ़ते हो , तो आप अस्तित्व के लिए इतनी अधिक अपनी ऊर्जा  बर्बाद कर देते हो, विकास में इसे नहीं लगाते हो.
लेकिन वह भी सच है,  हमारे एक मित्र ने आज कहा : “मेरी  प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत मजबूत है, क्योंकि मुझ पर बहुत बुरे असर रहे क्योंकि ने मैंएक मुश्किल जीवन जिया  है “यह भी सच है,  कि यह मदद करता है. लेकिन अगर तुम काफी भाग्यशाली  हो कि यह पोषक  वातावरण मिल रहा है , तो भगवान को  “धन्यवाद” कहें .अगर वह तुम्हें ऐसे हालात में डालता है, तो उसके आभारी हो  और इसके प्रति प्रसन्न  भाव  रखो  . यदि वह आप को नारकीय  तूफान में डालता है, इस में खुश और आभारी हो.
और यह मत भूलो ,  सतही पुनरावृत्ति पर्याप्त नहीं है. हमेशा उन  साधारण महिलाओं की  कहानी याद रखो , जो पानी ले जा रही  थी . एक उच्च कोटि के  गुरुजी एक नदी के किनारे पर बैठे हुए थे . वे एक बड़ी भीड़ को प्रवचन दे रहे थे .वे लोग  थे, बहुत हीआध्यात्मिक और सभी  पूरा ध्यान दे रहे थे . बस  आप की तरह, संदेश का इंतज़ार कर रहे थे  गुरुजी कह रहे थे : “मत भूलो , राम नाम, राम के  पवित्र नाम से,आप भव सागर को पार कर सकते हैं.” भीड़ मंत्रमुग्ध थी :”बहुत खूब! !  गुरुजी महान  है, “हर कोई अपने घर संतुष्ट भाव से गया और  तभी वे महिलाए, जो अपने  सिर पर बड़े बर्तन में पानी ले जा रही थी ,वहां से गुजर रही थीं ,जब गुरुजी ये बड़ा वाक्य कह रहे थे : “राम नाम करके आप सामग्री के अस्तित्व को पार कर सकते हैं” तो अगली बार वे महिलाऐं फिर से नदी पर आयीं  और वे दूसरी ओर पार करना चाहती थीं . लेकिन केवट सो गया था, तो नाव लेना असंभव था. तब वे सोचने लगीं : “अब क्या करें ?” और उनमें से एक ने कहा: “अरे, तुम्हें याद है? स्वामीजी ने कहा कि राम नाम के द्वारा हम भव सागर पार कर सकतेहैं! चलो कोशिश करते हैं, यह सिर्फ एक छोटी नदी है, ” वे सहमत हो गयीं :” आह! यह एक बहुत अच्छा विचार है, हम कोशिश करें ! राम! राम! राम … “नदी पार! तो वे ध्यान दे रही थीं . वे विश्वास के साथ अभ्यास कर रहीं थीं   और जब वे नदी पार कर रही थी.गुरुजी  उस समय नदी के दूसरे किनारे  पर ध्यान कर रहे थे . उन्होंने  नदी की सतह परचलने वाली महिलाओं को राम नाम जपते हुए देखा  और उन्होंने कहा: “हाँ! मैं इतना महान हूँ.देखा , बस मेरी सलाह द्वारा, वे नदी पर चल सकती  हैं.मुझमें कितना बल है ! मैं भी नदी पार कर सकता हूँ  ” वह तुरंत कूद गया और नदी पार करने की कोशिश की,लेकिन मौके पर ही डूब गया क्योंकि वह वास्तव में जो  कह रहा था,उस पर उसे  विश्वास नहीं था. इसलिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम  है: तुम अपने आपउस सलाह को बहुत गंभीरता से  लो जिसे आप दूसरों को बाँट  रहे हैं . पहले करो फिर बताओ.
यह विश्वास की शक्ति है. यह शुद्ध अभ्यास की शक्ति है. यह  भौतिक अस्तित्व के दुख सागर को पार करने का तरीका है.


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