Archives

Calendar

May 2021
M T W T F S S
« Apr    
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  

Sharanagati

Collected words from talks of Swami Tirtha




( श्री भ.क. तीर्थ महाराज के व्याख्यान से,२५ मई २००६ ,सोफिया )
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा था,”अपनी समस्त नासमझ इच्छाओं को त्याग दो क्यूंकि वो कृष्ण के चरण कमलों की शरण में जाने में कोई सहायता नहीं करती हैं.मंत्र जपने और सुनने में खुद को व्यस्त रखो | तब तुम निसंदेह कृष्ण की शरण में होंगे | एक छोटे परिवार में जन्म लेने वाला व्यक्ति कृष्ण की भक्ति -सेवा के लिए अनुपयुक्त (ख़राब) नहीं है .और न ही कोई भक्ति सेवा के लिए सिर्फ इसलिए श्रेष्ठ (सही ) है,क्योँ कि उसका जन्म एक संभ्रांत ब्राहमण परिवार में हुआ है | हर कोई जिसने भक्ति सेवा को अपनाया है,ऊँचा (असाधारण) है, जबकि वो ,जो भक्त नहीं है,सदैव निम्न स्तर पर है | इसलिए ईश्वर के प्रति भक्ति सेवा का पालन करने में , किसी की पारिवारिक स्थिति का कोई महत्व नहीं है |”
ईश्वर मनुष्यों में भेदभाव नहीं करता है| आप इसे मानते हैं? हर कोई मानता है कि ईश्वर भेदभाव नहीं करता है? | नहीं,ऐसा बिलकुल नहीं है , वो उन्हें ज्यादा पसंद करता है जो उसे प्यार करते हैं | हम सब इससे ज्यादा सहमत हैं | एक खास स्तर पर निसंदेह यह सच है — वह कोई भेदभाव नहीं करता है क्यूंकि हर कोई उसी के परिवार से है, हम ऐसा कह सकते हैं | पर सोच के देखो,क्या आप हर मनुष्य को सराह सकते हैं,अपने सभी भाई -बहनों एक ही प्रकार से चाह सकते हैं | हो सकता है सैद्धांतिक तौर पर हम ये कर सकते हैं | लेकिन यदि आप सही में अपनेआप को देखें तो आप पाएँगे कि आप का झुकाव उनकी ओर अधिक है,जो आपके अनुकूल हैं ..ऐसा ही है न? हाँ ,ऐसा ही है | कृष्ण सदैव सबको बुलाते हैं |.पर , जो उनसे जुड़ने को तैयार है,ऐसे व्यक्ति से वे अधिक प्रसन्न हैं | पर इसका ये अर्थ कदाचित नहीं है कि यह भेदभाव किसी खास व्यक्ति के लिए है, यह भेदभाव उनके लिए है,जो सिर्फ उछलने कूदने में हैं | वे किसीके विरुद्ध नहीं हैं,बल्कि सब के साथ हैं | हमें इस विशेषता को उनसे सीखना चाहिए | कभी भी किसी चीज के या किसी व्यक्ति के विरुद्ध न तो कुछ करो,न सोचो,बल्कि दूसरों के हित के लिए काम करो |
इस प्रकार चैतन्य महाप्रभु दया के अवतार के रूप में अवतरित हुए और वे मानव – मानव के बीच भेदभाव नहीं करते | वे हम सब को अपनी लीला से जुड़ने
के लिए आमंत्रित करते हैं | पहले सेवा और फिर आराम,क्यूंकि सेवा द्वारा हम उस लीला से जुड़ने योग्य बन सकते है | और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम योग्य है या अयोग्य- चैतन्य महाप्रभु के आमंत्रण पर हम सब संकीर्तन आन्दोलन से जुड़ सकते हैं | यही परमपिता परमात्मा की संस्तुति है|


Leave a Reply