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Sharanagati

Collected words from talks of Swami Tirtha




(श्री भ. क.तीर्थ  महाराज के व्याख्यान से उद्धृत , २५ .०२ .२००७ , सोफिया )
चेतना के एक स्तर  से दूसरे स्तर तक के  स्थानांतरण हेतु  कुछ साधन होना चाहिए, और यह साधन  आध्यात्मिक अधिकार है. हमने  प्रक्रियाओं पर चर्चा की है -जैसे  सोना   और जागते रहना . तो आध्यात्मिक जागृति की प्रक्रिया क्या है?आप इसे क्या कहते हैं?इसे दीक्षा कहते हैं.दीक्षा क्या है?दीक्षा क्या है इस बारे में आप की राय क्या है,
यशोदा : दूसरा जन्म.
हरी -लीला : यह किसी के लिए विचार की प्रस्तुति है.
रामविजय : नृत्य के लिए आध्यात्मिक निमंत्रण.
कृपाधाम : समर्पण का प्रथम चरण.
प्रेमा -लता : यदि कोई एक मंडली विशेष में स्वीकार्य हो.
तीर्थ  महाराज : हाँ …..,मेरी परिभाषा है :एकमात्र अवसर.दीक्षा ,एकमात्र अवसर है. एकमात्र अवसर का क्या मतलब है ?और दीक्षा-किसमें दीक्षा?एक दू;स्वप्न से दूसरे दू;स्वप्न में.एक मूर्खता से दूसरी बड़ी मूर्खता में?या किन्हीं रहस्यों में?या -जैसा कि तुमने कहा–निमंत्रित करना,  किसी को विद्यालय में पढाई  के लिए स्वीकार करना,कुछ सीखना.आध्यात्मिक प्रगति आरंभ करना, उसकी समाप्ति नहीं. कभी -कभी लोगों की चेतना इतनी सीमित होती और सशर्त होती है कि उस शर्त को वे उससे अधिल सशक्त शर्त से ही हटा सकते हैं. तो यदि आप को कोई लत लगी है,तो आप उस लत को दूसरी लत से ही बदल सकते हैं.आप अपनी परछाई अपने साथ लाते है.पहले आप  को किन्ही बुरी आदतों की सनक थी ,अब आप  किन्हीं सिद्धांतों के प्रति सनकी बन गए हो.एक जैसा,तरीका एक जैसा ही है. पर,यह विषय जरा हटकर है.पर तरीका बिलकुल वही है.क्या यही वास्तविक दीक्षा है?एक दू;स्वप्न से दूसरे दू;स्वप्न में?नहीं.वास्तविक दीक्षा का अर्थ है,ज्ञानोदय का आरम्भ.अत:यही एकमात्र अवसर है.
शीर्षस्थ  एक परिभाषा देते हैं है कि दीक्षा चमत्कार का अभ्यास करने कि भातिं है.ताकि  चमत्कार संभव  हो सके.
चमत्कारों के कितने सारे साधन हैं.अधिकतर हम सोचते हैं कि चमत्कार इच्छाओं कि पूर्ति होने पर घटे हैं.”मुझे इतना अच्छा काम मिल गया-चमत्कार है!ओह,में इस सुन्दरी से मिला –एक बुरा सपना–अरे नहीं-बुरा सपना नहीं – एक और चमत्कार!”
लेकिन आप जानते हैं,  एक विशेष पशु है, जिसे  कामधेनु  कहा जाता है.  “धेनु” का अर्थ है गाय, और “काम” इच्छा है. तो कामधेनु है विशेष पशु , वह असीमित दूध दे सकती  है. आप देख सकते हैं कि प्राचीन पारंपरिक संस्कृति में गाय बहुमूल्य  थी ,जब तक यह ,सजीव, जीवित थी  , क्योंकि तब यह दूध देती थी , बछड़ों को जन्म देती थी  – तो वे इसे जीवित रखते थे .. अब समय बदल गए हैं और कुछ लोगों को लगता है कि एक गाय तब तक  अच्छी  है जब  हम उसे  समाप्त  कर दें. वैसे भी, काम-धेनु  असीमित मात्रा में ढूध दे सकती है.इसलिए यदि  दूध, घी, पनीर आदि , सबसे अच्छी  भोजन सामग्री के लिए  आपकी इच्छा है, तो आप के पास  एक काम-धेनु  हो. लेकिन आप जानते हैं,कामदेव-धेनु   पहाड़ों में नीचे-ऊपर नहीं चल रहीं हैं. और एक काम -धेनु  कि क्षमता  थोड़ी सी सीमित है , क्योंकि यह केवल दूध देती है. लेकिन  हमारी तो इच्छाओं की  एक इतनी  लंबी सूची है, कि  एक काम -धेनु से तो  हमें पूरा नहीं होता.  –
आध्यात्मिक जीव विज्ञान के अनुसार हम जंगल के आसपास चलते हैं और हम कुछ अन्य प्रजातियों खोजने की कोशिश करते हैं – यह है  कल्प वृक्ष-, इच्छा को पूरा करने वाला  पेड़ . यह बेहतर है, यह विभिन्न प्रकार की इच्छाओं को पूरा कर सकता  है. आपको वह  पुरानी  कहानी है याद है  कि एक भूखे  भिखारी को इतनी  थकान लगी , कि वह सिर्फ एक पेड़ की छाया में कुछआराम करना चाहता था. याद है. और उसने कहा:   “ओह! मैं बहुत प्यासा हूँ! मुझे पानी चाहिए! “इसके तत्काल उसे  थोड़ा पानी दिखाई दिया. उपास आ रसने सोचा: “यह बहुत दिलचस्प है! . हो सकता है यह  चमत्कार है “उसने  पानी ले लिया, और तब  कहा:” जलअच्छा है, लेकिन पेट खाली है. मैं बहुत भूखा हूँ! काश खानेपीने की कुछ चीजें भी होतीं .”.फिर अचानक प्रसाद की एक बड़ी प्लेट के उसके सामने प्रकट हो गयी . उसने  खाना  शुरू कर दिया और तृप्त हो गया . तो उसे  समझ में आया : “ओह, मैं इच्छा-वृक्ष  के नीचे बैठा हूँ, काफी अच्छा है! यह बढ़िया है .” “उसने  कहा: “.अब मैं संतुष्ट हूँ, लेकिन कितना  अच्छा होगा अगर कोई मुझे एक मालिश कर देता .. ..”जल्द ही नौकर , परिवार, पशु, मकान – सब कुछ अभी या बाद में आ रहा था  और आता जा रहा था , और वह  बढ़ता जा रहा था. अंत में वह एक राजा की तरह महसूस करने लगा और उसने  कहा: “अब मैं इतना शक्तिशाली हो गया हूँ   कि मैं  एक बाघ से भी लड़ सकताहूँ!”बेशक, तुरंत पेड़ के नीचे बाघ प्रकट हो गया.
अत: इच्छा-वृक्ष (कल्पतरु)कामधेनु से भी बेहतर है,यह विभिन्न इच्छाओं को संतुष्ट कर सकता है.अगली बार जब आप वितोषा पर घूमने जाएँ और किसी पेड़ के नीचे बैठे हों -तो बाघ से पहले रूक जाएँ.
चमत्कार एक और माध्यम से हो सकते हैं  और वो साधन है चिंतामणि पत्थर .यह चिंतामणि पत्थर बहुत विशेष है.यह परस -पत्थर है.यह जो कुछ भी छुए-चाहे लोहा ही हो,उसे सोने में बदल देता है.यह सर्वोत्तम है!सोने से आप जो चाहते हो,वह ले सकते हो.और यह जितना चाहो ,उतना बना सकते हैं.चिंतामणि पत्थर कि बस एक यही सीमा है  — यह दूसरा चिंतामणि पैदा नहीं कर सकता.इसमें यही कमी है.
इसलिए अगर आप  आध्यात्मिक रूप से  जागृत होना चाहते हैं, कामदेव-धेनु  के पास मत जाइए,कल्प वृक्ष के नीचे बैठें  नहीं,  चिंतामणि पत्थरों से संतुष्ट नहीं हो. क्योंकि इनसे,  चमत्कारों के लिए जो आपकी  इच्छा है,वह  पूरी  नहीं होगी . आध्


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