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Sharanagati

Collected words from talks of Swami Tirtha




हमें प्यार के साथ, स्नेह के साथ नाम का जाप करना चाहिए. यह अल्पज्ञता मंत्र के लिए पर्याप्त नहीं है, यह नियमित रूप से मंत्र जाप करने के लिएभी पर्याप्त नहीं है, यह ख़ुशी के रूदन के समान है : “कृष्ण!” या सहायता कि पुकार के रूप में होनी चाहिए: ” कृष्ण” स्नेह आतंरिक हो सकता है , अन्यथा यह काम नहीं करेगा. यदि स्नेह के बिना किसी भी व्यक्ति का नाम, – आप नाम का जाप करते हो , वह जवाब नहीं देगा .यदि आप के बच्चे को बुलाते हो : बोजिदर ,यहाँ आओ,में तुम्हें मारूंगा!” वह बेवकूफ ही हो सकता है ,जो मार खाने की बात सुनकर वहां आएगा.तो जप की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण है. और फिर, इस गुणात्मकता , जप भावनात्मकता ,के परिणाम स्वरुप ,आशीर्वाद आप तक आ जाएगा. यह आनंदित और आध्यात्मिकता मुक्त भव कहाँ है? यह कल है? यह कहीं और है? अगला जीवन? भौतिक क्षेत्र छोड़ने के बाद? नहीं, यह ठीक यहीं है और अभी है . कृष्ण की दया हमेशा रहती है, लेकिन आप को इसे अनुभव करने के लिए अपनी दृष्टि को शुद्ध करना है.

कृष्ण की बांसुरी विभिन्न प्रकार की हैं, विभिन्न प्रयोजनों के लिए विभिन्न बांसुरी वंशी ,वंशुली , वेणु और कई, कई प्रकार की हैं . एक बांस से बनी है , दूसरी संगमरमर से बनी है , तीसरी सोने से बनी है. एक रत्नों से जड़ी है, उनकी एक और बांसुरी अमृत वितरण कर रही है. एक छोटी है, दूसरी लंबी है. और वे विभिन्न प्रयोजनों के लिए अलग-अलग बांसुरी का उपयोग करते हैं, क्योंकि कृष्ण हर रूप में आकर्षक हैं,हम पिछली बार इस बार पर सहमत हुए, तो वे अलग-अलग बांसुरियों का उपयोग करते हैं , हरेक प्रकार के जीव को वापस घर आमंत्रितकरने के लिए.

यहाँ तक कि वैदिक मन्त्रों का जाप करने वाले भी वस्तुत: कृष्ण की वंशी की आवाज़ के पीछे हैं.यहाँ तक कि गायत्री मन्त्र भी कृष्ण की वंशी की धुन है, पर वे ब्रह्मण के लिए नहीं,गायों के लिए बजा रहे हैं और गोपीओं के लिए भी अर्थात सीदे सादे मन वाले लोगों के लिए.और वे तो उसके पीछे चलने के लिए तैयार हैं.तो मेर सुझाव है-मन में जटिलता न रखें,क्यूंकि कृष्ण की बंसी के अनुकरण की क्या बात करें,इसे तो सुनना ही अति कठिन होगा.सादगी है परिभाषा या कृष्ण चेतना केलिए स्पष्टीकरण है. इसलिए हम एक आन्दमय प्रार्थना के रूप में महामंत्र का जाप कर सकते हैं.यह एक बहुत कठिन साधना नहीं है. यह एक तपस्या या आत्म यातना की तरह नहीं है.”मैं इस मंत्र का जाप करके अपने आप को कष्ट दूं . यह महामंत्र दर्दनाक है “नहीं, यह एक आनंदमयी प्रार्थना है:“कृष्ण !”

तुम्हें इसके बारे में काफी कुछ पता है,तो मैं इसे क्यूँ दोहराऊँ

आशीर्वाद की प्रार्थना स्वरुप हमें इस महामंत्र का जाप करना चाहिए,तब ह्रदय का गहरे से गहरा दर्द भी बदल जाएगा. .प्रेम करना अर्थात पीड़ा.पीड़ा के बिना प्रेम नहीं है.पीड़ा/दर्द नहीं है तो प्रेम भी नहीं.यह आप के ह्रदय को चीर दे, ह्रदय को फाड़ दे,आपके प्राण हर ले.आप को कोशिश करनी चाहिए.इन सम्वेंगों से तो आप मर ही जाएँ.विनाशकारी अनुभव.लेकिनअच्छी तरह से अगर आप मंत्र जाप कर रहे हैं ,तो पवित्रा नाम की कृपा से इन दर्दनाक भावनाओं को बदल सकते हैं.आप को खुद के लिए इसे करने की कोशिश करनी चाहिए, मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकता.आप कर के देखिए.



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